0:00 नमस्कार साथियों, कैसे हैं आप सब? दिखाई
0:02 यह पड़ रहा है कि इन दिनों माननीय की कोई
0:05 मान नहीं रहा। मैं बात कर रहा हूं ऑनरेबल
0:07 सुप्रीम कोर्ट के बारे में। आप देख रहे
0:09 होंगे कि सत्ता पक्ष और सुप्रीम कोर्ट के
0:11 बीच ही आज की डेट में जंग छिड़ गई है। कुछ
0:13 समय पहले तक कुछ समुदाय विशेष के लोग
0:16 सुप्रीम कोर्ट के बारे में कह रहे थे कि
0:18 हम उनकी नहीं मानते। अब तो सत्ता पक्ष ही
0:20 सुप्रीम कोर्ट से लड़ने लग गया है। जिसे
0:22 देखो वही सुप्रीम कोर्ट का कंटेंप्ट यानी
0:25 अवमानना कर रहा है। कारण कौन है? कौन
0:28 जिम्मेदार है? मुझे लगता है इसके लिए
0:30 स्वयं सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। आपको
0:32 एक केस याद होगा प्रशांत भूषण वाला।
0:34 प्रशांत भूषण वाले मामले में सुप्रीम
0:37 कोर्ट ने प्रशांत भूषण जो कि सुप्रीम
0:38 कोर्ट के एक वरिष्ठ एडवोकेट हैं उनके
0:40 खिलाफ अवमानना का मामला चलाया। आफ्टर ड्यू
0:43 हियरिंग पूरी सुनवाई करने के बाद एक का
0:45 जुर्माना लगाया और प्रशांत भूषण इस
0:47 जुर्माने में शर्मिंदा महसूस करने की जगह
0:49 वो एक के साथ फोटो खिंचवाते हुए पोस्ट लिख
0:52 रहे थे और वीडियो बना रहे थे। मुझे लगता
0:54 है कि सुप्रीम कोर्ट को या तो उस मामले
0:56 में माफ कर देना चाहिए था प्रशांत भूषण को
0:58 या सुनवाई के बाद ठीक सजा देनी चाहिए थी
1:01 ताकि और लोग सुप्रीम कोर्ट की अवमानना
1:03 करने से बचते। बहरहाल मैं आज बात करने
1:06 वाला हूं उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ साहब
1:08 के एक बयान के बारे में। उन्होंने कहा कि
1:10 संविधान का आर्टिकल 142 एक परमाणु मिसाइल
1:13 बन गया है जिसका उपयोग सुप्रीम कोर्ट कर
1:16 रहा है। यह आर्टिकल 142 क्या है? जगदीप
1:19 धनखड़ साहब ने ऐसा क्यों कहा? सुप्रीम
1:21 कोर्ट ने 142 का उपयोग कब कब किया है। आज
1:24 इस बारे में बहुत डिटेल में मैं आपको
1:26 समझाने वाला हूं। जुड़े रहना है लास्ट तक
1:28 इस लेक्चर से ताकि कानून की बारीकियों को
1:31 आप आसान शब्दों में समझ पाए और यह भी समझ
1:33 पाए कि देश में चल क्या रहा है। आइए शुरू
1:36 करते हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही
1:38 में आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करके
1:40 तमिलनाडु के राज्यपाल को विधेयक रोकने पर
1:43 फटकार लगाई थी और राष्ट्रपति को भी
1:45 निर्देश दे दिए थे। प्रश्न यह उठता है कि
1:47 क्या सुप्रीम कोर्ट किसी मामले में
1:49 राष्ट्रपति को निर्देश दे सकता है या पहले
1:51 कभी दिया है? तो हुआ यह कि तमिलनाडु
1:54 विधानसभा में 2020 से 2023 के बीच 12
1:57 विधेयक पारित हुए। इन्हें मंजूरी के लिए
1:59 राज्यपाल आर एन रवि के पास भेजा गया।
2:02 उन्होंने विधेयकों पर कोई कार्यवाही नहीं
2:04 की और उन्हें अपने पास दबाकर रख लिया। तो
2:06 राज्यपाल और राष्ट्रपति को विधेयकों के
2:08 संबंध में पॉकेट वीटो यानी जेबी वीटो का
2:11 अधिकार है। इसके तहत वह करते क्या है कि
2:13 जिस कानून को मंजूरी नहीं देनी है उसे
2:15 अपने पास रख लेते हैं और उस कानून को फिर
2:18 मान्यता मिलती ही नहीं है। वो कानून बंद
2:20 बस्ते में रख दिया जाता है। ऐसा कह सकते
2:22 हैं। अक्टूबर 2023 में तमिलनाडु सरकार ने
2:25 सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई। इसके बाद
2:27 राज्यपाल ने 10 विधेयक बिना साइन किए लौटा
2:30 दिए और दो विधेयकों को राष्ट्रपति के पास
2:32 विचार के लिए भेज दिया। सरकार ने 10
2:35 विधेयक दोबारा पारित कर राज्यपाल के पास
2:37 भेज दिए। राज्यपाल ने इस बार उन्हें
2:39 राष्ट्रपति के पास भेज दिया। सुप्रीम
2:42 कोर्ट ने 8 अप्रैल 2025 को एक सुनवाई करते
2:45 हुए राज्यपाल के इस तरह विधेयक अटकाने को
2:47 अवैध और गैर संवैधानिक बताया। जस्टिस जेबी
2:50 पारदीवाला की बेंच ने गवर्नर से कहा कि आप
2:53 कॉन्स्टिट्यूशन के हिसाब से चलें।
2:55 पार्टियों की मनमर्जी नहीं चलेगी।
2:57 राज्यपाल ने ईमानदारी से काम नहीं किया।
3:00 ऐसा सुप्रीम कोर्ट का कहना है। इसलिए
3:02 कोर्ट ने आदेश दिया कि इन 10 विधेयकों को
3:04 पारित माना जाए। यानी कि अब यह कानून बन
3:06 गए हैं। ऐसा मान लिया जाए। आपको बता दूं
3:08 कि देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि
3:11 राज्यपाल के बिना सहमति के कानून लागू हो
3:14 गए हैं। दरअसल हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में
3:16 यह निर्धारित किया ही नहीं गया है कि
3:18 विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल या
3:20 राष्ट्रपति कितने दिनों के लिए रोक सकते
3:22 हैं या कितने दिनों के भीतर उन्हें मंजूरी
3:24 देनी है। संविधान में सिर्फ इतना लिखा है
3:27 कि उन्हें जितनी जल्दी हो सके एस सून एस
3:29 पॉसिबल फैसला लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने
3:32 यह जितनी जल्दी हो सके इसकी व्याख्या कर
3:34 दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य
3:37 सरकार कोई विधेयक मंजूरी के लिए भेजती है
3:39 तो राज्यपाल को एक महीने के भीतर
3:41 कार्यवाही करनी होगी। अगर राज्यपाल इस
3:44 विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजते हैं तो
3:46 राष्ट्रपति के पास भी इस पर फैसला लेने के
3:48 लिए 3 महीने का समय होगा। इससे ज्यादा दिन
3:50 तक अगर वह विधेयक को लौटाते हैं तो उन्हें
3:52 उचित कारण बताना होगा। अगर राज्यपाल या
3:54 राष्ट्रपति समय सीमा के भीतर कोई
3:56 कार्यवाही नहीं करते हैं तो सरकारें जो है
3:58 वह कोर्ट तक जा सकती हैं, अदालत जा सकती
4:00 हैं। अब आते हैं उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़
4:03 साहब के बयान पर कि क्यों उन्होंने कहा कि
4:05 आर्टिकल 142 एक परमाणु मिसाइल बन गया है
4:07 और ऐसी टिप्पणी क्यों की कि जो हमारे देश
4:10 का सुप्रीम कोर्ट है वो राष्ट्रपति को
4:12 निर्देश नहीं दे सकते। उनके कार्यों पर
4:14 टिप्पणी नहीं कर सकते। ऐसा क्यों कहा? तो
4:16 17th अप्रैल को उपराष्ट्रपति जगदीप धनकर
4:18 ने एक भाषण देते हुए कहा कि अदालतें
4:20 राष्ट्रपति को आदेश कैसे दे सकती हैं?
4:22 उन्होंने कहा कि संविधान का आर्टिकल 142
4:25 यह कोर्ट को मिला एक विशेष अधिकार है।
4:27 लेकिन इसका उपयोग लोकतंत्र के खिलाफ जो
4:30 शक्तियां हैं उनके लिए कारगर साबित हो गया
4:33 है। और लोकतांत्रिक शक्तियां जो हैं उनके
4:36 खिलाफ इसका उपयोग किया जा रहा है।
4:38 न्यूक्लियर मिसाइल की तरह जज सुपर
4:40 पार्लियामेंट की तरह काम कर रहे हैं। ऐसा
4:42 उन्होंने कहा। तो अब बता दूं कि आर्टिकल
4:44 142 क्या है? और कॉन्स्टिटुएंट असेंबली
4:47 में जब 142 पर चर्चा हो रही थी तो बाबा
4:50 साहब आंबेडकर ने इस आर्टिकल के बारे में
4:52 क्या कहा था? तो आपको बता दूं कि जब हमारा
4:54 संविधान बन रहा था तो संविधान निर्माताओं
4:56 ने संविधान में वो सब बातें शामिल की थी
4:59 जो बहुत महत्वपूर्ण थी और जो उस समय सोची
5:02 जा सकती थी। इसके साथ ही आर्टिकल 142
5:05 शामिल किया गया था जिसके जरिए सुप्रीम
5:07 कोर्ट को पूर्ण न्याय यानी कंप्लीट जस्टिस
5:09 करने की विशेष शक्ति दी गई थी ताकि जब
5:12 कानून के मौजूदा प्रावधान पर्याप्त ना हो
5:14 या स्पष्ट हो तब भी न्याय सुनिश्चित किया
5:17 जा सके। जब इस आर्टिकल को संविधान में
5:20 साबित करने की बात हुई तो लंबी बहस चली और
5:23 अंबेडकर साहब ने कंक्लूडिंग रिमार्क में
5:25 कहा देयर मे बी मेनी मैटर्स वेयर दी
5:27 ऑर्डिनरी लॉ मे नॉट बी एबल टू गिव अ
5:30 रेमेडी। आर्टिकल 142 इज अ सेफ्टी वाल्व।
5:33 मतलब यह कि अगर कोई मामला इतना साधारण हो
5:36 कि मौजूदा कानून के जरिए न्याय ना किया जा
5:39 सके तो आर्टिकल 142 सुप्रीम कोर्ट के लिए
5:42 सेफ्टी वाल्व का काम करेगा। तो आपको बता
5:45 दूं कि 1950 से 2023 तक सुप्रीम कोर्ट ने
5:48 लगभग 1500 से ज्यादा मामलों में एग्जैक्ट
5:51 फिगर है 1579 मामलों में आर्टिकल 142 का
5:56 उपयोग किया और फैसले सुनाए। इसमें कुछ
5:58 मामले तो बहुत चर्चित हैं। कुछ महत्वपूर्ण
6:00 मामलों का मैं उल्लेख कर दूं जो सामने
6:01 आपकी स्क्रीन पर आ रहे हैं। सबसे चर्चित
6:03 अयोध्या राम मंदिर बाबरी मस्जिद वाला
6:06 मामला। कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में
6:08 फैसला दिया और मस्जिद के लिए अयोध्या में
6:10 ही पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया और
6:13 इसका उपयोग 142 आर्टिकल के तहत किया गया।
6:15 फिर है 2012 का सहारा और सेबीके। सुप्रीम
6:18 कोर्ट ने सहारा ग्रुप के निवेशकों को पैसा
6:20 लौटाने का आदेश दिया और इसके लिए विशेष
6:23 मैकेनिज्म भी तैयार किया जिसे कानून में
6:25 स्पष्ट रूप से परिभाषित किया ही नहीं गया
6:27 था। फिर 2023 का शिवसेना महाराष्ट्र सरकार
6:30 विवाद कोर्ट ने माना कि तत्कालीन डेपुटी
6:33 स्पीकर ने गलत कदम उठाए लेकिन बागी
6:35 विधायकों की सदस्यता को बहाल रखने या
6:38 निरस्त करने से इंकार कर दिया। आर्टिकल
6:40 142 की संभावित सीमाएं दिखाई पड़ी। फिर एक
6:43 केस था 2023 का दिल्ली वर्सेस एलजी का
6:46 मामला। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली
6:48 सरकार को अफसरों पर अधिकार है और आर्टिकल
6:50 142 का इस्तेमाल करके ट्रांसफर पोस्टिंग
6:53 से जुड़े दिशा निर्देश जारी किए थे। फिर
6:56 2016 में हाईवे के किनारे शराब बिक्री पर
6:58 रोक लगाने का मामला। सुप्रीम कोर्ट ने
7:01 नेशनल हाईवे के 500 मीटर के भीतर शराब
7:04 बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी और ऐसा करने
7:06 के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने आर्टिकल 142
7:09 का उपयोग किया था। तो आर्टिकल 142 सुप्रीम
7:12 कोर्ट को सुप्रीम पावर देता है जस्टिस
7:14 करने के लिए और कंप्लीट जस्टिस करने के
7:16 लिए। मुझे उम्मीद है कि इस आर्टिकल के
7:19 बारे में थोड़ी बहुत जानकारी आप तक पहुंची
7:20 होगी। लेकिन जो कुछ भी सरकार की तरफ से
7:23 सर्वोच्च न्यायालय पर हमला किया जा रहा
7:25 है। चाहे वो निशिकांत दुबे ने जो कुछ कहा
7:27 या जगदीप धनखड़ जी ने जो कुछ कहा क्या यह
7:30 ठीक है? देश में सर्वोच्च कौन है? संसद
7:33 है, राष्ट्रपति है, संविधान है या
7:36 न्यायपालिका है? एक लेक्चर बहुत डिटेल में
7:38 लेकर आऊंगा जिस पर हम कानून के दायरे में
7:40 इसके बारे में बात करेंगे। मुझे लगता है
7:42 कि सर्वोच्च न्यायालय पर इस तरह से हमला
7:45 और बयानबाजी करके सुप्रीम कोर्ट को कमजोर
7:48 करने का काम किसी को नहीं करना चाहिए।
7:50 किसी एक संस्था पर हमारा विश्वास ही हमें
7:52 न्याय तक ले जाएगा। अगर हम किसी भी संस्था
7:55 पर विश्वास नहीं करेंगे तो फिर सड़कों पर
7:57 न्याय होने लगेगा। क्या हम हमारी
7:59 डेमोक्रेसी में ऐसा चाहते हैं कि 2025 में
8:02 हम बयानबाजी करके या सड़कों पर न्याय करें
8:05 या जो संस्थाएं ठीक काम नहीं कर रही हैं
8:07 ऐसा लगता है उन्हें ठीक करने के लिए कानून
8:09 बनाएं। मुझे लगता है सभी पक्षों को
8:11 बयानबाजी से बचना चाहिए। एक दूसरे का
8:13 सम्मान करना चाहिए और जनता की भलाई के लिए
8:16 नियम और कानून लेकर आना चाहिए। आपको क्या
8:19 लगता है? जरूर कमेंट बॉक्स में जुड़कर
8:21 बताइए और अगले लेक्चर में मैं बात करूंगा
8:24 देश में सर्वोच्च कौन है? जुड़े रहना है
8:26 आपको अपने फेवरेट प्लेटफार्म विधिक शिक्षा
8:28 से। नमस्कार जय हिंद
8:33 [संगीत]