0:00 अगर आपका एक हाथ काट दिया जाए, एक आंख
0:02 निकाल ली जाए और एक पैर तोड़ दिया जाए, तो
0:04 आप पूरी जिंदगी भगवान को कोसते हुए एक
0:07 बेचारे और लाचार की तरह बिता देंगे और
0:09 कहीं गलती से पैसे वाले होंगे तो दो-चार
0:12 नौकर रख लेंगे और सेवा लेंगे। राणा सांगा
0:14 तो राजा थे। उनके पास अथाह पैसा था। लेकिन
0:17 जब बात मेवाड़ पर आई, जब बात राजपूतों पर
0:20 आई, जब राजपूतों को जड़ से उखाड़ने के लिए
0:22 बाबर की सेना आगरा से निकली। तो जहां बाबर
0:25 सेना के पीछे-पीछे आ रहा था, तो वहीं राणा
0:27 सांगा अपनी सेना के आगे छाती चौड़ी किए उस
0:30 आताताई से लड़ने के लिए खड़े थे। याद
0:33 रखिएगा एक आंख नहीं, एक हाथ नहीं और एक
0:36 पैर टूटा हुआ। और आज ऐसे बहादुर योद्धा को
0:40 गद्दार कहा जा रहा है कुछ चंद वोटों के
0:43 लिए। अरे आपको तो गर्व होना चाहिए उस राणा
0:45 सांगा पर जिसके ना केवल जीते जी बल्कि
0:47 जिसके मरने के बाद भी उनकी आगे आने वाली
0:50 पीढ़ियों ने मुगलों से कभी समझौता नहीं
0:52 किया जबकि दूसरी तरफ कई राजपूत जागीरों ने
0:55 मुगलों से संधियां की समझौता किया जिससे
0:58 युद्ध को टाला जा सके लेकिन राणा सांगा के
1:00 मेवाड़ ने ऐसा कभी नहीं किया| राणा सांगा
1:03 ने 18 बड़े युद्ध लड़े बाबर को भी हराया
1:06 और जिस खानवा के युद्ध में बाबर जीता वहां
1:08 राणा सांगा मरे नहीं थे बस घायल हुए थे
1:11 उनको तो अपनों ने मारा जो इस बात की गवाही
1:14 देता है कि हमारा देश गद्दारों से भरा
1:16 पड़ा है और उनमें से कुछ गद्दार आज भी
1:19 जिंदा हैं। साथियों आप सभी का हाइपर
1:20 क्वेस्ट के एपिसोड नंबर 144 में स्वागत
1:23 है। आज मैं आपको इतिहास के पन्नों में
1:25 पीछे ले चलूंगा और दिखाऊंगा कि कौन कितना
1:28 बड़ा गद्दार है। साथियों आप सभी हाइपर
1:30 क्वेस्ट चैनल को सब्सक्राइब कर लें। बेल
1:31 आइकन को प्रेस करके नोटिफिकेशंस भी ऑन कर
1:34 लें जिससे हमारी वीडियोस आपको सबसे पहले
1:36 मिले। अब बिना किसी विलंब के आज की वीडियो
1:39 को प्रारंभ करते हैं।
1:50 तो साथियों हम भारतीयों को राणा सांगा तब
1:52 याद आते हैं जब समाजवादी पार्टी के नेता
1:55 रामजीलाल सुमन संसद में एक विवादित बयान
1:58 देते हैं। वो कहते हैं कि मुसलमान तो बाबर
2:00 की संताने हैं लेकिन हिंदू हिंदू तो
2:02 गद्दार राणा सांगा की संताने हैं क्योंकि
2:04 राणा सांगा ने बाबर को भारत पर आक्रमण
2:07 करने के लिए आमंत्रित किया था। कि बाबर को
2:10 लाया कौन? बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने
2:13 के लिए राणा सांगा लाया था। तो मुसलमान तो
2:16 बाबर की औलाद है और तुम गद्दार राणा सांगा
2:19 की औलाद हो। अब ये बात रामजीलाल सुमन बड़ी
2:21 फुर्ती और कॉन्फिडेंस से शायद इसलिए कह
2:23 पाते हैं क्योंकि उनको किसी ने बाबर की
2:26 ऑटोबायोग्राफी बाबरनामा पढ़ाई होगी। या
2:28 फिर यह बताया होगा कि ऐसी बात बाबरनामा
2:31 में लिखी हुई है कि राणा सांगा का एक दूत
2:33 एक संदेश लेकर उसके पास आया था जिसमें
2:35 राणा सांगा बाबर को आमंत्रित करते हैं
2:37 उत्तर से दिल्ली पर हमला करने के लिए और
2:39 यह भी वादा करते हैं कि उस समय वो आगरा से
2:42 दिल्ली पर हमला करेंगे और मिलकर इब्राहिम
2:45 लोदी को हराएंगे। अब साथियों ये जितना
2:47 सीधा लग रहा है उतना सीधा है नहीं क्योंकि
2:49 जब बाबर ने दिल्ली पर उत्तर से आक्रमण
2:52 किया तो राणा सांगा जी ने आगरा की तरफ से
2:54 दिल्ली पर आक्रमण किया ही नहीं और इसीलिए
2:57 बाबर अपनी बाबरनामा में आगे लिखता है कि
2:59 काफिर राणा सांगा ने आगरा की तरफ से
3:01 दिल्ली पर हमला नहीं किया और गद्दारी की।
3:04 अब जो शब्द बाबर के हैं कि राणा सांगा
3:06 गद्दार निकला वही शब्द रामजीलाल सुमन के
3:09 संसद में हैं कि राणा सांगा गद्दार हैं।
3:12 तो चलिए समझते हैं कि असली माजरा क्या है
3:14 कि बाबर और रामजीलाल सुमन दोनों एक ही सुर
3:17 में राणा सांगा को गद्दार कह रहे
3:23 हैं। अब साथियों ये पूरा मामला अर्ली 16
3:26 सेंचुरी का है। और अगर इस मिस्ट्री को
3:28 सॉल्व करना है कि बाबर ने आखिर भारत पर
3:30 आक्रमण क्यों किया? तो हमें आक्रमणकारी
3:32 बाबर, दिल्ली में बैठा सुल्तान इब्राहिम
3:34 लोदी और मेवाड़ के राजा राणा सांगा इन
3:37 तीनों की तत्कालीन स्थितियों को समझना
3:39 पड़ेगा। और आप सभी को पता है कि दिल्ली
3:41 नए-नए राजाओं का गढ़ रही है। अगर किसी ने
3:44 भी पंजाब के रास्ते भारत पर आक्रमण किया
3:46 है तो उसका पहला गोल होता था दिल्ली पर
3:49 कब्जा करना। तो आइए सबसे पहले दिल्ली में
3:51 बैठे सुल्तान इब्राहिम लोदी के बारे में
3:54 जानते हैं। साथियों, लगभग 500 साल के
3:56 संघर्ष के बाद किसी विदेशी आक्रमणकारी ने
3:59 1192 में एक भारतीय नेटिव किंग को हराया
4:02 था। यह आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी था और
4:04 हारने वाले राजा पृथ्वीराज चौहान थे और
4:07 पृथ्वीराज चौहान जी के हारने के बाद पहली
4:09 बार दिल्ली पर किसी विदेशी का कब्जा हो
4:12 गया था। अब इसके बाद मोहम्मद गौरी तो वापस
4:14 चला जाता है लेकिन अपने गुलामों को दिल्ली
4:17 की सत्ता पर बैठा कर जाता है और यहीं से
4:19 शुरू होती है दिल्ली सल्तनत। यह दिल्ली
4:21 सल्तनत 1206 से 1526 तक यानी बाबर के आने
4:25 तक भारत में रही और इस दिल्ली सल्तनत के
4:28 लगभग 300 सालों में पांच बड़ी डायनेस्टीज
4:31 हुई। जिनमें से लोदी डायनेस्टी अंतिम
4:33 डायनेस्टी थी और दिल्ली सल्तनत का अंतिम
4:35 सुल्तान इब्राहिम लोदी था। 1517 में जब
4:38 उसके पिता सिकंदर लोदी की मृत्यु हुई तब
4:40 वह सत्ता पर आरूढ़ हुआ और 1526 तक लगभग 9
4:44 साल तक दिल्ली पर राज किया लेकिन इब्राहिम
4:46 लोदी के बाद दिल्ली सल्तनत मटियामेट हो गई
4:49 और दिल्ली पर मुगलों का कब्जा हो गया। तो
4:51 आप समझ सकते हैं कि इब्राहिम लोदी एक मरती
4:54 हुई दिल्ली सल्तनत का सुल्तान था और जिस
4:56 तरह से वो राज्य करता था उसके जितने भी
4:58 गवर्नर्स थे वो उससे खुश नहीं थे।
5:00 ज्यादातर गवर्नर्स उसके पिता सिकंदर लोदी
5:02 के लिए तो लॉयल थे लेकिन उसके शासनकाल में
5:05 उसके खिलाफ बगावत करने लगे थे। इसके कई
5:08 रीज़न हैं। मुख्य रीज़न अगर मैं बताऊं तो
5:10 सबसे पहला सिकंदर लोदी में जो शासन करने
5:12 के गुण थे वो इब्राहिम लोदी में नहीं थे।
5:14 इसीलिए इब्राहिम लोदी बहुत इनसिक्योर रहता
5:16 था। बहुत डरा रहता था कि उसका राज्य कोई
5:19 छीन ना ले। अगर उसका एक भाई उस पर हमला
5:21 करता था तो सभी दूसरे भाइयों को बिना वजह
5:24 बंदी बना लेता था। उसको लगता था आज एक भाई
5:26 ने हमला किया है तो बाकी भी कर सकते हैं।
5:28 तो बिना किसी कारण के अपने हर एक व्यक्ति
5:31 पर शक करता था और इसी वजह से जो पुराने
5:33 कमांडर्स थे उनको वो रिप्लेस कर देता था
5:36 नए कमांडर से जिससे जो नए कमांडर्स हो वो
5:38 उसके लिए लॉयल रहें। तो आप यहां पर
5:40 इब्राहिम लोदी के बारे में मोटा-मोटा समझ
5:42 गए हैं। अब हम बढ़ते हैं मेवाड़ के राजा
5:45 राणा सांगा की तरफ।
5:50 अब साथियों जिस दिल्ली सल्तनत की हमने बात
5:52 की उसके दक्षिण पश्चिम में मेवाड़ का
5:54 राज्य था और जिस समय इब्राहिम लोदी दिल्ली
5:56 सल्तनत पर शासन कर रहा था उस समय मेवाड़
5:58 में राणा सांगा शासन कर रहे थे। वैसे देखा
6:01 जाए तो 1508 ईस्वी में ही राणा सांगा
6:03 मेवाड़ की गद्दी पर बैठ गए थे। लेकिन 1520
6:06 आते-आते राणा सांगा एक बहुत ही ताकतवर
6:08 राजा के रूप में उभरे थे। ऐसा कैसे हुआ?
6:10 अगर आप मेवाड़ को देखें तो मेवाड़ चारों
6:13 तरफ से इस्लामी शासकों से घिरा हुआ था।
6:15 अगर आप नॉर्थ में देखें तो इब्राहिम लोदी
6:17 था। साउथ में अगर आप मालवा में जाते तो
6:19 वहां पर महमूद खिलजी द्वितीय का शासन था।
6:21 और वहीं साउथ में अगर आप गुजरात की सल्तनत
6:23 देखें तो वहां पर मुजफ्फर शाह द्वितीय का
6:25 शासन था। चारों तरफ इस्लामिक शासक थे। एक
6:27 अकेला हिंदू राज्य बीच में था तो इसलिए
6:29 हमेशा वो खतरों से घिरा रहता था और ऐसे
6:32 में राणा सांगा पृथ्वीराज चौहान के बाद
6:34 पहले राजपूत राजा हुए थे जिन्होंने
6:36 राजपूतों को एकत्रित किया था, संगठित किया
6:39 था और अखंड भारत का सपना दिखाया था। आप यह
6:42 भी कह सकते हैं कि उत्तर भारत में राणा
6:44 सांगा वो आखिरी हिंदू राजा थे जिन्होंने
6:46 ना केवल अपनी सीमा का विस्तार किया बल्कि
6:48 उसको नियंत्रित भी किया। राणा सांगा गद्दी
6:51 संभालने के बाद 18 बड़े युद्ध लड़ते हैं
6:53 जिसमें वह मालवा को भी जीतते हैं। गुजरात
6:55 के उत्तरी भागों को भी जीतते हैं और
6:57 इब्राहिम लोदी से भी लड़कर उसकी भी ताकत
6:59 को कमजोर करते हैं। 1517 से लेकर 1520 के
7:03 बीच में राणा सांगा इब्राहिम लोदी को कम
7:05 से कम तीन बार हराते हैं। एक बार खतौली
7:07 में, एक बार धौलपुर में और एक बार रणथंबोर
7:10 में और इतनी बुरी तरह हारने के बाद
7:12 इब्राहिम लोदी का जो थोड़ा बहुत वर्चस्व
7:14 राजस्थान के अंदर था वो पूरी तरह से खत्म
7:16 हो जाता है। और जो राणा सांगा के राज्य की
7:18 सीमाएं होती हैं, वह आगरा तक पहुंच जाती
7:21 हैं। और साथियों, इब्राहिम लोदी से इन्हीं
7:23 युद्धों के दौरान उनका एक हाथ कट जाता है
7:25 और उनका एक पैर कमजोर पड़ जाता है। लेकिन
7:27 वो फिर भी रिटायर नहीं होते हैं और अपनी
7:29 सेना को आगे आने वाले युद्धों में भी
7:31 फ्रंट से बहादुरी के साथ लीड करते हैं। तो
7:34 राणा सांगा के इसी पराक्रम को देखकर उस
7:36 समय राजपूताना के जितने भी राजा होते हैं
7:39 वो राणा सांगा को एक साथ अपना समर्थन देते
7:42 हैं और यह पहली बार होता है कि इतने ढेर
7:44 सारे हिंदू राजा जो आपस में बैर रखते थे
7:47 वो सभी एक साथ आकर विदेशी ताकतों से लड़ने
7:50 के लिए तैयार हो गए थे। तो अब जब मेवाड़
7:52 की सीमाएं आगरा तक पहुंच गई थी तो राणा
7:54 सांगा का अगला टारगेट दिल्ली था। साथियों
7:57 अब आप इब्राहिम लोदी और राणा सांगा के
7:59 बारे में बहुत सी बातें जान गए हैं। अब
8:01 आइए जानते हैं बाबर की कहानी। फिर हम इस
8:04 पजल को सॉल्व
8:08 करेंगे। साथियों आज के समय में अक्सर यह
8:10 प्रश्न उठाया जाता है कि आज आधुनिक समय
8:13 में रामायण और महाभारत की या फिर वेद
8:15 पुराणों की क्या आवश्यकता है? साथियों जब
8:17 परिस्थितियां प्रतिकूल होती हैं, जब आपको
8:19 आशा की कोई किरण नहीं दिखाई देती, तब आपके
8:22 जो आदर्श होते हैं इतिहास में वही आपका
8:24 बेड़ा पार लगाते हैं। आपको याद होगा कि जब
8:27 छत्रपति संभाजी महाराज औरंगजेब के सामने
8:29 खड़े थे तो औरंगजेब के सामने इसीलिए टिक
8:32 पाए क्योंकि औरंगजेब में उन्हें रावण दिखा
8:34 और अपने अंदर हनुमान जी और ऐसे ही वीर
8:36 राणा सांगा एक हाथ और एक पैर के दम पर
8:39 बाबर से लड़ पाते हैं क्योंकि उन्हें
8:41 अभिमन्यु के बारे में पता था जो अकेले
8:43 कितने महारथियों से लड़ गया था। तो आपका
8:46 इतिहास और आपके पूर्वजों का ज्ञान विपरीत
8:48 परिस्थितियों में एक शक्ति के रूप में
8:50 उभरता है और इसी दिशा में हमारे भारतीय
8:53 ज्ञान से हमको ज्यादा से ज्यादा लाभ हो।
8:55 हम विपरीत परिस्थितियों में अच्छा कर सकें
8:57 और अपने जीवन में आगे बढ़ सकें। हमने
8:59 शिक्षणम प्लेटफार्म बनाया है। जहां पर आप
9:01 वेदों के ज्ञान को, उपनिषदों के ज्ञान को,
9:03 दर्शनों को, हमारे प्राचीन आचार्यों के
9:05 ज्ञान को अपने फोन पर ही सीख सकते हैं। 1
9:08 लाख से ज्यादा विद्यार्थी शिक्षणम पर
9:10 दैनिक रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा से
9:12 जुड़कर अपने जीवन को बेहतर बना रहे हैं और
9:15 इस समय हम ज्ञानोत्सव मना रहे हैं। हमारे
9:17 प्रत्येक कोर्स पर आपको 30% का एक्स्ट्रा
9:20 डिस्काउंट भी दे रहे हैं। जिससे ज्यादा से
9:21 ज्यादा लोग इस अमूल्य ज्ञान से जुड़ पाएं।
9:24 आपको सारी डिटेल्स वेबसाइट और ऐप की लिंक
9:26 नीचे डिस्क्रिप्शन बॉक्स और कमेंट सेक्शन
9:28 में मिल जाएगी। मैं आप सभी का शिक्षणम पर
9:30 स्वागत करता हूं। चलिए अब आज की वीडियो
9:32 में आगे बढ़ते हैं। अब साथियों भारत में
9:34 मुगल वंश की स्थापना बाबर ने की थी। बाबर
9:37 के इतिहास को अगर आप समझना चाहें तो बाबर
9:39 आधा मंगोल आधा मुस्लिम था। मां की तरफ से
9:42 अगर आप देखें तो चंगेज़ खान का वंशज था और
9:44 अगर आप पिता की तरफ से देखेंगे तो तैमूर
9:46 लंका वंशज था। बाबर उज्बेकिस्तान में
9:48 फरगाना की घाटियों में पैदा हुआ था और
9:51 मात्र 12 वर्ष की आयु में वो फरगाना के
9:53 तख्त पर बैठ गया था और तख्त पर बैठने के
9:56 बाद मात्र 2 वर्ष के भीतर उसने समरकंद को
9:59 भी जीत लिया था। लेकिन साथियों उस छोटी
10:01 उम्र में इतनी अच्छी शासन कला नहीं थी
10:03 बाबर की क्योंकि जब वो समरकंद जीतता है तो
10:06 फरगाना को हार जाता है और समरकंद को जीतने
10:08 के बाद जब वो वापस फरगाना को लेने जाता है
10:10 तो उसके हाथ से समरकंद फिर से निकल जाता
10:13 है और जब फरगाना और समरकंद उन दोनों को
10:15 फिर से वो क्लेम करने जाता है तो 1501 में
10:18 उज़्बेक का एक प्रिंस होता है मोहम्मद
10:20 शाहबानी वह बाबर को खदेड़ देता है और बाबर
10:22 को उज़्बेकिस्तान से भागकर काबुल आना
10:25 पड़ता है और फिर बाबर काबुल में अपनी
10:27 सत्ता को स्थापित करता है और एक बार काबुल
10:29 में अपने पैर पैर को जमाने के बाद 1504 से
10:32 लेकर 1514 तक बाबर लगातार समरकंद को जीतना
10:36 चाहता है। कई बार वह जीतता भी है लेकिन
10:38 कुछ दिनों में हार जाता है और ऐसा कई बार
10:40 होता है और जब वो समरकंद को तीन बार जीतकर
10:42 हार जाता है तो उसकी समरकंद में रुचि घट
10:45 जाती है और अब वो भारत की तरफ देखने लगता
10:48 है। वो अपनी ऑटोबायोग्राफी बाबरनामा में
10:50 यह भी लिखता है कि वह हमेशा से हिंदुस्तान
10:53 को जीतने का ख्वाब देखता था और इसके पीछे
10:55 सबसे बड़ा कारण था कि वह काबुल में बहुत
10:58 ढेर सारे दुश्मनों से घिरा हुआ था। जहां
11:00 उसको उज़्बेक से भी लड़ना पड़ता था। वहीं
11:02 जो लोकल अफगानी रिबेल्स होते थे उनसे भी
11:05 लड़ना पड़ता था। इसलिए उसको अपने एक
11:06 स्टेबल राज्य के लिए एक नई जगह चाहिए थी
11:09 और वो नई जगह ऐसी भी होनी चाहिए थी जो इन
11:12 दुश्मनों से सुरक्षित हो। तो ऐसे में उसको
11:14 पता था कि अगर वह सिंधु नदी को पार कर
11:16 लेता है तो वह सुरक्षित और सेफ जगह पर भी
11:18 पहुंच जाएगा और अपने राज्य के लिए एक नए
11:21 किंगडम को स्थापित कर पाएगा। और ऐसे में
11:23 जब बाबर को पता चलता है 1517 में कि
11:26 सिकंदर लोदी की मृत्यु हो गई है और दिल्ली
11:28 का जो तख्त है अब वो इब्राहिम लोदी के पास
11:30 है जो कि एक कमजोर शासक है। तो बाबर अपने
11:32 ख्वाब को पूरा करने के लिए 1519 से लेकर
11:35 1524 तक लगातार पंजाब पर चढ़ाई करने लगता
11:39 है। तो बाबर भी दिल्ली पर कब्जा करके भारत
11:42 पर राज करना चाहता था। तो हमारे पास तीन
11:44 लोग हैं जिनकी निगाहें दिल्ली पर है। एक
11:46 तो इब्राहिम लोदी जो अपनी दिल्ली सल्तनत
11:49 को आगे बढ़ाना चाहता है। दूसरे राणा सांगा
11:51 जो अखंड भारत बनाना चाहते हैं और तीसरा
11:53 बाबर जो एक नई सुरक्षित भूमि ढूंढ रहा है
11:56 अपने दुश्मनों से बचने के लिए और अपना
11:58 राज्य स्थापित करने के लिए। तो अब साथियों
12:01 आइए पता लगाते हैं कि किसने किसको बुलाया
12:04 था।
12:07 अब साथियों हमने जितना भी समझा उससे एक
12:10 बात तो क्लियर है कि बाबर को कोई बुलाता
12:12 या ना बुलाता भारत पर आक्रमण बाबर तो जरूर
12:15 करता क्योंकि यह बाबर की नीड थी। बाबर
12:18 अपने दुश्मनों से भागना चाहता था। एक नई
12:20 जगह चाहता था। सुरक्षित जगह चाहता था जहां
12:22 पर वो शासन कर सके और साथ में सिकंदर लोदी
12:25 की मृत्यु उसके लिए बहुत बड़ा इनविटेशन थी
12:27 क्योंकि अब दिल्ली सल्तनत कमजोर हो गई थी।
12:30 इसीलिए 1517 के बाद उसने चार बार पंजाब पर
12:33 चढ़ाई की जिससे वह भारत में किसी ना किसी
12:35 तरह से एक्सेस पा जाए। अब साथियों आ जाते
12:38 हैं इस मुद्दे पर कि बाबर को असल में
12:40 इब्राहिम लोदी के खिलाफ किसने आमंत्रित
12:42 किया? अब साथियों जिस बाबरनामा से
12:44 रामजीलाल सुमन ये प्रमाण दे रहे हैं कि
12:46 राणा सांगा जी ने बाबर को आमंत्रित किया
12:48 इब्राहिम लोदी पर आक्रमण करने के लिए। उसी
12:51 बाबरनामा में साफ-साफ बाबर लिखता है कि
12:53 पंजाब का गवर्नर दौलत खान लोदी इब्राहिम
12:56 लोदी पर आक्रमण करने के लिए बाबर से कहता
12:58 है। क्योंकि जैसा कि मैंने बताया था कि
13:00 कोई भी गवर्नर जो उस समय इब्राहिम लोदी के
13:03 अंडर काम कर रहा था उसके अधीन होकर दूसरी
13:05 रियासतों पर काम करने वाले गवर्नर अब उससे
13:07 खुश नहीं थे और उसमें सबसे ज्यादा नाख था
13:10 दौलत खान लोदी। और दौलत खान लोदी के लिए
13:13 तो दोनों तरफ से समस्या थी। एक तरफ वो
13:15 पंजाब को संभाल रहा था इब्राहिम लोदी के
13:17 लिए और वो इब्राहिम लोदी को पसंद नहीं
13:19 करता था और दूसरी तरफ पंजाब संभालना बहुत
13:22 आसान काम नहीं था क्योंकि बाबर लगातार
13:24 हमले कर रहा था। तो ऐसे में दौलत खान लोदी
13:27 बुरी तरह से टूट जाता है और इससे पहले कि
13:29 वो दोनों तरफ से पिस जाता वो एक साइड लेना
13:32 चाहता है और इसीलिए वो बाबर की तरफ जाता
13:34 है यह सोचकर कि बाबर की तरफ होकर इब्राहिम
13:37 लोदी को हरा दिया जाएगा और बाबर दिल्ली को
13:39 लूटकर वापस अफगानिस्तान चला जाएगा तब दौलत
13:42 खान लोदी दिल्ली पर बैठकर राज करेगा। पर
13:44 दोस्तों बाबर कोई भोला इंसान नहीं था।
13:46 उसको सारी इंटेंशंस पता थी और दौलत खान
13:49 लोदी को दिल्ली तो दूर बाबर ने पंजाब पर
13:51 भी राज करने नहीं दिया। जब बाबर ने पंजाब
13:53 पर हमला किया तो दौलत खान लोदी पर भी हमला
13:56 कर दिया और उससे पंजाब छीनकर उसे पंजाब से
13:59 बाहर खदेड़ दिया और फिर वह आगे बढ़ता है
14:02 और 1526 में 21 अप्रैल के दिन पानीपत के
14:05 प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को भी हरा
14:07 देता है और दिल्ली पर कब्जा करके भारत में
14:10 मुगल वंश की स्थापना करता है। अब साथियों
14:13 इस मुद्दे पर भी आते हैं कि क्या राणा
14:15 सांगा ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने के
14:18 लिए आमंत्रित किया था? क्योंकि बाबर ने तो
14:20 बाबरनामा में यही लिखा है। तो साथियों इस
14:22 फैक्ट पर कई इतिहासकारों ने एनालिसिस की
14:25 है और कुछ पॉइंट्स रखे हैं। अगर इन
14:26 पॉइंट्स को आप अच्छे से समझ लें तो आपको
14:28 पता चल जाएगा कि बाबर ने साफ यहां पर झूठ
14:31 लिखा है। पहला पॉइंट कि जिस इब्राहिम लोदी
14:34 को उसके घर में घुसकर राणा सांगा ने एक
14:37 नहीं तीन-तीन बार हराया हो उसको हराने के
14:39 लिए किसी विदेशी की सहायता राणा सांगा को
14:42 क्यों चाहिए थी? और वह भी तब जब इतिहास
14:45 में प्रूफ है कि विदेशी आक्रांताओं ने
14:47 हमारे पूर्वजों के साथ क्या किया है। क्या
14:49 किया था पृथ्वीराज चौहान के साथ? क्या यह
14:51 बात राणा सांगा और उनके मंत्रियों को नहीं
14:54 पता थी? और अगर हम यह भी मान लें कि राणा
14:56 सांगा ने बाबर को बुलाया था तो बाबर को
14:58 बुलाने के बाद बाबर की तरफ से राणा सांगा
15:01 लड़े क्यों नहीं? और अगर नहीं लड़े और
15:03 बाबर इस बात से गुस्सा होकर राणा सांगा पर
15:05 हमला कर रहा है तो क्या राणा सांगा के
15:07 अंदर इतनी कूटनीति नहीं थी कि जिसको
15:09 इनवाइट किया है उसके साथ संधि की जा सके।
15:12 क्या वह कोई बहाना नहीं बना सकते थे? राणा
15:14 सांगा बाबर से एक नहीं दो बार लड़ते हैं।
15:17 जो दिखाता है कि राणा सांगा बाबर से किसी
15:20 भी तरह के समझौते के लिए नहीं तैयार थे।
15:23 तीसरा मान लीजिए कि यह स्ट्रेटजी थी राणा
15:25 सांगा की बाबर को बुलाकर इब्राहिम लोदी से
15:28 लड़वाने की और खुद दूर बैठकर इस लड़ाई को
15:30 देखने की और जो जीतता उससे फिर राणा सांगा
15:33 लड़कर दिल्ली पर कब्जा करते। मान लीजिए कि
15:36 यह स्ट्रेटजी का पार्ट था। तो क्या यह
15:37 स्ट्रेटजी राजपूतों के दस्तावेजों में ना
15:40 मिलती? राजपूत क्या इसका गुणगान नहीं
15:42 करते? क्यों किसी राजपूत दस्तावेज में आज
15:44 तक नहीं कहीं पर मिला है कि राणा सांगा ने
15:47 बाबर को आमंत्रित किया था। वहीं अगर आप
15:49 राजपूत दस्तावेजों में देखेंगे तो जो
15:51 बाबरनामा में लिखा है कि दौलत खान लोदी ने
15:53 बुलाया था वो राजपूत दस्तावेजों में भी
15:55 मिलता है। तो जो दौलत खान लोदी ने
15:57 आमंत्रित किया इब्राहिम लोदी से लड़ने के
15:59 लिए वो बात बाबरनामा में भी है। वो बात
16:02 राजपूतों के दस्तावेज में भी है। लेकिन
16:04 राणा सांगा ने बाबर को बुलाया यह केवल
16:06 बाबरनामा में है जो बाबर की जुबानी है और
16:09 किसी भी दस्तावेज में चाहे वो मुगलिया
16:10 दस्तावेज हो या राजपूतों के दस्तावेज हो
16:13 कहीं पर नहीं दिया गया है। तो इस बात का
16:15 कोई कोरबोरेशन बाबरनामा के अलावा किसी भी
16:18 डॉक्यूमेंट किसी भी दस्तावेज में क्यों
16:20 नहीं मिलता? यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है
16:22 कि एक राजा किसी दूसरे राजा से संधि कर
16:25 रहा हो, समझौता कर रहा हो, उसे आमंत्रित
16:27 कर रहा हो और उसके ही राज्य और उसकी आगे
16:29 आने वाली पीढ़ियों ने इस स्ट्रेटजी के
16:31 बारे में नहीं लिखा हो। और मान लीजिए एक
16:33 बार के लिए राणा सांगा का यह प्लान फेल हो
16:35 गया हो। वो बुलाए हो बाबर को। उसके बाद
16:37 बाबर इब्राहिम लोदी को हराकर वापस ना गया
16:40 हो और उल्टा राणा सांगा पर हमला कर दिया
16:42 हो तो क्या इस फेलर के बारे में किसी ने
16:44 नहीं लिखा होगा। सभी राजपूत इतने भी लॉयल
16:46 नहीं थे राणा सांगा के लिए बहुत से ऐसे
16:48 राजपूत थे जो राणा सांगा के खिलाफ भी थे।
16:51 तो अगर अपने राजपूतों ने नहीं लिखा लेकिन
16:53 ऐसा क्या हुआ कि दुश्मन राजपूतों ने भी
16:55 राणा सांगा जी के इस फेलियर के बारे में
16:57 नहीं लिखा। चौथा आप रीमा हुजा की किताब
17:00 पढ़ेंगे ए हिस्ट्री ऑफ राजस्थान तो वहां
17:02 पर यह भी क्लेम किया गया है कि अगर आप
17:04 राजपूत वर्जन पर जाएंगे और राजपूत सोर्सेस
17:06 को देखेंगे तो कई सोर्सेस में यह तक माना
17:08 गया है कि राणा सांगा ने बाबर को नहीं
17:10 बल्कि बाबर ने राणा सांगा की हेल्प मांगी
17:13 थी इब्राहिम लोदी से लड़ाई करने के लिए और
17:15 जब बाबर ने राणा सांगा से हेल्प मांगी थी
17:17 तो राणा सांगा जी ने यह संदेश भिजवाया था
17:19 क्योंकि इब्राहिम लोदी हम दोनों का कॉमन
17:21 एनिमी है तो हम साथ में लड़ सकते हैं।
17:23 लेकिन इस संदेश को भिजवाने के बाद हो सकता
17:25 है कि मंत्रियों ने और सलाहकारों ने इस
17:27 बात को समझाया हो कि यह गलत कदम है। हम एक
17:30 विदेशी आक्रांता की तरफ से नहीं लड़ सकते
17:32 और इसीलिए ही राणा सांगा जब बाबर ने
17:35 पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी
17:37 के खिलाफ आक्रमण किया तो राणा सांगा जी ने
17:40 नहीं किया। लेकिन साथियों इन सब आर्गुमेंट
17:42 के बाद एक आर्गुमेंट अभी भी बचता है कि
17:44 फिर वह क्या रीज़न रहा कि बाबरनामा में
17:46 बाबर ने इस बात को मेंशन किया। हमें यहां
17:48 पर एक दो चीज़ समझनी पड़ेगी। बाबर इब्राहिम
17:51 लोदी पर जब आक्रमण करता है तो अपनी सेना
17:53 को यह आश्वासन दिलाता है कि इब्राहिम लोदी
17:56 को हराने के बाद दिल्ली पर कब्जा करने के
17:58 बाद जिसको भी अफगानिस्तान वापस जाने का मन
18:00 करेगा उसको वो छोड़ देगा। तो सेना को यह
18:03 विश्वास दिलाकर बाबर आया था। लेकिन जब
18:05 बाबर ने दिल्ली पर कब्जा किया और जब उसको
18:07 राणा सांगा के बारे में पता चला तो उसको
18:09 यह पता चल गया था कि दिल्ली भी एक सेफ जगह
18:12 नहीं है क्योंकि उसके पड़ोस में एक ताकतवर
18:14 राजा का शासन है और जब तक वो उससे नहीं
18:16 जीत लेगा तब तक वो शांति से अपने शासन को
18:19 नहीं कर सकता। तो राणा सांगा के खिलाफ
18:21 युद्ध छेड़ने के लिए उसको एक रीजन चाहिए
18:23 था और इस रीजन को जस्टिफाई करने के लिए
18:25 उसने अपने बाबरनामा में इस रीजन को इजाता
18:28 किया और आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि
18:30 बाबरनामा लिखते समय ज्यादातर समय बाबर नशे
18:34 में रहता था बाबर शराब का आदि था
18:36 पूरे-पूरे दिन शराब पीता था और इस बारे
18:38 में उसने बाबरनामा में खुलकर लिखा
18:44 है अब साथियों बयाना करके एक जगह है
18:46 राजस्थान में भरतपुर के पास और इस जगह पर
18:49 फरवरी 1527 में बाबर की सेना राणा सांगा
18:53 की सेना से पहली बार टकराती है और यहां पर
18:56 बाबर की बुरी तरह हार होती है और इस युद्ध
18:58 के बाद राजपूतों की एकता भी बहुत बढ़ जाती
19:01 है। लेकिन यहां पर राणा सांगा जी से एक
19:03 गलती होती है। गलती कहें या फिर हिंदू
19:05 राजाओं के उदारवादी नीति कहें कि जब भी वह
19:07 दुश्मनों को हराते थे तो उनको जाने देते
19:09 थे। जैसे इब्राहिम लोदी का ही केस ले लें
19:11 तो तीन बार हराया है राणा सांगा जी ने
19:13 लेकिन तीनों बार जाने दिया है। तो बयाना
19:16 में हराने के बाद बाबर पर फिर से तुरंत
19:18 चढ़ाई नहीं करते। इससे बाबर को दोबारा
19:20 अटैक करने के लिए 1 महीने का गैप मिल जाता
19:23 है और इसमें वह और भी अच्छी स्ट्रेटजी
19:25 बनाता है और दूसरा जब वह दोबारा लड़ने आता
19:28 है तो जिहाद की घोषणा करके आता है। यानी
19:30 अब वो अपने साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं
19:32 बल्कि इस्लाम के खातिर युद्ध करेगा। ऐसा
19:34 वो क्यों करता है इसके दो रीज़न है। पहला
19:37 रीज़न यह है कि बयाना में बुरी तरह हारने
19:39 के बाद जो उसके सैनिक थे जो पहले ही
19:41 अफगानिस्तान जाना चाहते थे पानीपत के
19:43 प्रथम युद्ध के बाद। वो सैनिक अब लड़ने से
19:46 मना कर देते हैं। विशेषकर राणा सांगा के
19:48 साथ जब वो अपने सैनिकों को हताश देखता है
19:50 लेकिन उसके मन में हिंदुस्तान को जीतने का
19:52 सपना इतना बुलंद हो जाता है कि किसी भी
19:55 तरह सामदाम दंड भेद लगाकर राणा सांगा को
19:57 हराना चाहता है तो उसके मन में यह
19:59 स्ट्रेटजी आती है कि अगर इस युद्ध को एक
20:02 पर्सनल युद्ध से ऊपर उठाकर इस्लाम के
20:04 खातिर लड़ा जाने वाला युद्ध में बदल दिया
20:06 जाए तो दो चीजें हो सकती हैं। पहला तो
20:08 हमारे जो सैनिक हैं जो हताश हैं वो मजहब
20:11 के नाम पर जोश से भर जाएंगे। दूसरा राणा
20:13 सांगा की तरफ वो सभी लोग जो मुसलमान हैं
20:16 वो भी कहीं ना कहीं जिहाद के नाम पर राणा
20:18 सांगा का साथ छोड़ देंगे। अब प्लान तो
20:21 अच्छा था लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली
20:23 बात यह है कि बाबर बिल्कुल भी मजहबी नहीं
20:25 था। वो सारा दिन शराब पीता था। मुसलमानों
20:28 से टैक्स लेता था तो किसी भी तरह से वो
20:30 कुरान शरीफ को फॉलो नहीं करता था और यह
20:32 बात उसके सैनिक और मंत्री सलाहकार आदि
20:34 जानते थे। तो सैनिक अभी भी भरोसा करने के
20:37 लिए रेडी नहीं थे। उनको भरोसा दिलाने के
20:39 लिए बाबर ने उसी दिन शराब छोड़ दी। जितनी
20:42 भी शराबें पड़ी थी उनको तुड़वा दिया और
20:44 शराब को बैन करा दिया। साथ में मुसलमानों
20:47 से जो वो टैक्स लेता था उसको भी बंद कर
20:50 दिया। इतना करने के बाद सैनिकों को लगा कि
20:52 बाबर यहां पर सीरियस है। इसीलिए उसके
20:55 सैनिक मजहब के नाम पर लड़ने के लिए तैयार
20:57 हो जाते हैं। तो बाबर अब गाजी बनना चाहता
21:00 था और इसीलिए काफिर राणा सांगा के खिलाफ
21:02 उसने जिहाद छेड़ दिया। इस बार उसकी सेना
21:05 और भी जोश से भरी हुई थी और उसने इस बार
21:07 तोपों और बारूदों का और भी अच्छे तरीके से
21:10 प्रयोग किया। साथियों राणा सांगा की जो
21:12 सेना थी वो तोपों से और बारूदों वाले वेपन
21:15 से लड़ने के लिए अकष्टम नहीं थी। जब तोप
21:17 गोले फेंकते थे तो बहुत ढेर सारे सैनिक एक
21:19 साथ मरते थे। साथ में उन गोलों की आवाज और
21:22 आघात से जो हाथी थे राणा सांगा की सेना
21:25 में वह पागल भी हो गए और वह पागल हाथी
21:27 अपनी ही सेना के सैनिकों को कुचलने भी लगे
21:30 थे। इसके साथ एक प्रॉब्लम और थी। राजपूतों
21:32 को एकत्रित तो किया गया था, संगठित किया
21:35 गया था लेकिन चूंकि राजपूत अपनी-अपनी
21:37 टुकड़ी लेकर आए थे तो जब कोई एक राजपूत
21:39 मरता था तो उसकी टुकड़ी युद्ध में आगे
21:41 लड़ने से मना कर देती थी। एक राजपूत मरा
21:44 तो उसके साथ-साथ 5000 6000 सैनिक वापस लौट
21:47 जाते थे। ऐसे में राणा सांगा ने निश्चय
21:49 किया कि मैं आगे जाकर लड़ाई करूंगा जिससे
21:51 जो पीछे जितने सैनिक हैं वो मुझे एक राजा
21:54 मानकर पूरे गर्व और शौर्य के साथ लड़ाई
21:56 करें। जब राणा सांगा आगे जाते हैं हाथी पर
21:58 बैठकर तो बाबर एक स्ट्रेटजी लगाता है।
22:00 बाबर एक तीरंदाजों की टुकड़ी को स्पेशली
22:03 राणा सांगा पर लगा देता है। तो ऐसे में जब
22:05 राणा सांगा पर बाणों की वर्षा होती है तो
22:07 एक तीर उनके माथे में आकर लगता है और वह
22:10 बेहोश हो जाते हैं। वो हाथी के ऊपर अपनी
22:12 जगह पर गिर जाते हैं जिसको सेना देखकर
22:14 निराश होती है। जहां पर बेहोश राणा सांगा
22:16 जी को युद्ध के मैदान से बाहर ले जाया
22:18 जाता है और तुरंत ही जो उनके साथ आए थे
22:21 अज्जा जी वो उनके मुकुट को धारण करके सेना
22:24 के नेतृत्व को पुनः संभालते हैं। सेना एक
22:26 बार फिर खड़ी होती है लड़ाई करती है लेकिन
22:29 बाबर की तोपों के सामने नहीं टिक पाती और
22:31 इसमें बाबर की जीत होती है। अब साथियों जब
22:34 राणा सांगा को होश आता है तो उनको लगता है
22:36 कि बाबर हार चुका है और मेवाड़ जीत गया
22:38 है। लेकिन उनको बताया जाता है कि बाबर
22:40 हारा नहीं है। होश आने के बाद तुरंत बाद
22:42 वह बाबर से फिर से लड़ना चाहते थे। उनको
22:45 बताया जाता है कि बाबर अब चंदेरी की तरफ
22:47 बढ़ रहा है और मालवा को जीतना चाहता है।
22:49 राणा सांगा कहते हैं कि हमें चंदेरी की
22:51 तरफ कच करना चाहिए और बाबर से लड़ना
22:53 चाहिए। मैं बाबर से बिना जीते घर नहीं
22:55 लौटूंगा। यहां उनको समझाया जाता है कि अभी
22:58 हम कमजोर हैं। मेवाड़ जो है अनस्टेबल है।
23:00 जब मेवाड़ स्टेबल हो जाए हम पुनः अपनी
23:03 ताकत बना लें तो बाबर को हम हरा देंगे।
23:05 लेकिन राणा सांगा यहां पर अपनी जिद पर अड़े
23:07 रहते हैं और शायद इसी वजह से उनको अपनी ही
23:10 जहर दे देते हैं। तो साथियों एक तरफ ऐसा
23:13 योद्धा है जिसके पास पूरा शरीर नहीं है।
23:15 एक हाथ एक पैर के दम पर वो फिर से बाबर से
23:18 लड़ना चाहता है और आज एसी में बैठकर चार
23:21 टाइम का खाना ठूंसकर लोग उन्हें गद्दार कह
23:23 रहे हैं। और यही हिंदुओं की हजारों वर्षों
23:26 से कमजोरी रही है गद्दारी। गद्दार राणा
23:28 सांगा नहीं है। गद्दार तो हर वो एक भारतीय
23:30 और हिंदू है जो ऐसे स्टेटमेंट का सपोर्ट
23:32 करता है या इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाता।
23:35 और यह एक पैटर्न है। आप जब तक बटे रहेंगे
23:37 तो आपके योद्धाओं के साथ यही किया जाएगा।
23:39 श्री राम जी पर प्रश्न उठाया जाएगा। श्री
23:41 कृष्ण जी को छलिया बोला जाएगा। छत्रपति
23:43 शिवाजी महाराज को एक छोटे कस्बे का राजा
23:45 कहा जाएगा। शंभू राजे को अय्याश कहा जाएगा
23:48 और आज राणा सांगा को गद्दार कहा गया है और
23:51 जब ऐसा कहा जाता है तो दूसरी तरफ शराबी
23:54 धूर्त बाबर जैसे लोगों के कसीदे पढ़े जाते
23:57 हैं। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि हिंदू
23:59 बटे हुए हैं। आप राजपूत जाट बाबन बनिया
24:02 में बटे रहिए और ऐसे होते रहेगा। मुझे अब
24:04 कुछ और कहने का मन नहीं है। इस वीडियो को
24:06 यहीं पर समाप्त करता हूं। जय श्री राम।