This content analyzes the Union Budget for the 2026-27 financial year presented by the Finance Minister, focusing on aspects relevant to competitive exams, including key announcements, economic reforms, and fiscal targets.
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सो हेलो एवरीवन। इस पर्टिकुलर वीडियो में जो आज यानी कि संडे को 2026 27 फाइनेंसियल
ईयर का जो बजट प्रस्तुत किया गया है हमारी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण जी के
द्वारा उसको देखने वाले हैं। लेकिन एग्जाम पर्सपेक्टिव से। ठीक है? बिकॉज़ बजट आप
देखेंगे तो ये जो डॉक्यूमेंट है जो मैं आपको दिखाने वाला हूं। इसमें बहुत सारी
चीजें ऐसी हैं जो हमारे एग्जाम के लिए इंपॉर्टेंट नहीं होती हैं। तो हम एग्जाम
पर्सपेक्टिव से इसको देखने वाले हैं। ऑलराइट? तो स्टार्ट करने से पहले सबसे
पहली चीज तो ये है कि जो हम बेसिक्स जान लें। हैं बेसिक्स इन दी सेंस कि ये जो बजट
प्रेजेंट किया गया है बाय आवर फाइनेंस मिनिस्टर यह नाइंथ क्सक्यूटिव बजट है।
पहली बात यानी कि लगातार नौवीं बार निर्मला सीतारमण जी ने बजट पेश किया है।
यह करने वाली वो पहली देश की महिला वित्त मंत्री बन चुकी हैं। और वैसे अगर देखें तो
मोरारजी देसाई ने 10 टाइम्स क्सक्यूटिवली बजट पेश किया है। तो अगला वाला जब बजट पेश
करेंगे निर्मला सीतारमण जी तो उनके रिकॉर्ड को मैच कर लेंगी और उसके अगले बार
भी अगर करती हैं तो उनके रिकॉर्ड को क्रॉस कर लेंगी। ऑलराइट वैसे तो अभी सेकंड नंबर
पे हैं क्सक्यूटिवली बजट प्रेजेंट करने के मामले में सबसे ज्यादा नौ। ये जो इनकी आज
स्पीच रही है वो 1 घंटे और 25 मिनट की रही है। ये खैर उतना एग्जाम में नहीं पूछता
है। ठीक है? लेकिन जो एग्जाम में पूछ सकता है दैट इज़ ये चीज है कि सबसे पहली बार ऐसा
हुआ है इस बार कि संडे को बजट प्रेजेंट हुआ है। ठीक है? आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ
कि संडे में बजट पेश किया गया हो। ऑलराइट? तो ये चीज़ थोड़ी सी आपको ध्यान रखनी है।
टॉकिंग अबाउट बेसिक्स जो हम पॉलिटी वगैरह या फिर इकोनॉमिक्स में से पढ़ते हैं। दैट
इज़ बजट वर्ड एज़ सच कहीं पे मेंशन नहीं है हमारी कॉन्स्टिट्यूशन में। इट इज़ एनुअल
फाइनेंशियल स्टेटमेंट जो आर्टिकल नंबर 112 वार्षिक वित्तीय विवरण के बारे मेंशन करता
है और वहां पे भले ये प्रेजेंट किया जाता है बजट बाय दी फाइनेंस मिनिस्टर बट बजट
किया जाता है इन द नेम ऑफ़ प्रेसिडेंट क्योंकि अगर आप इस आर्टिकल की वर्डिंग
पढ़ेंगे तो आपको समझ में आएगा द प्रेसिडेंट शैल कॉस्ट टू बी लेट बिफोर बोथ द हाउसेस
ऑफ़ पार्लियामेंट इस तरीके से लिखा हुआ क्या पे प्रेसिडेंट शैल कॉस्ट टू बी लेट
शैल कॉस्ट टू बी लेट मतलब उसके नाम से रखा जा रहा है रखता कौन है फाइनेंस मिनिस्टर
उसमें होता क्या है जो हमारा अगला फाइनेंसियल ईयर है जैसे ये वाला अगर बात
करें 2026 27 फाइनेंसियल ईयर की बात करें कब से शुरू होता है 1 अप्रैल से शुरू होता
है और 31 मार्च तक चलता है तो इसमें गवर्नमेंट के एस्टेटेड रिसीट्स यानी कि
इनकम और एक्सपेंडिचर यानी खर्चे वो कितने रहने वाले हैं वो यहां पे होता है वो सबसे
हम आखिर में देखेंगे लेकिन यहां पे गवर्नमेंट के क्या नए अनाउंसमेंट हैं वो
सारी चीजें हम पहले यहां पे देखते हैं। लेकिन उससे पहले एक चीज और हम यहां पे
रिवाइज़ कर लेते हैं पिटी के एंड दैट इज़ कि बजट की स्टेजेस क्या होती हैं? तो बजट
की स्टेजेस होती हैं उसको हम कैसे याद करते हैं? उसको याद करते हैं पीडीएस और
वैफ। ठीक है? या फिर डफ करके भी याद कर सकते हो। प्रेजेंट किया जाता है बजट को
पहले। ठीक है? तो प्रेजेंट यू प्रेजेंट लोकसभा में ही किया जाता है इसको। ठीक है?
ठीक है? देन डिस्कशन होता है। डिस्कशन दोनों हाउसेस में होता है। डिस्कशन के बाद
स्क्रूटनी होती है बाय डिपार्टमेंटल जो स्टैंडिंग कमिटीज होती हैं। आपको पता है
टोटल 24 हमारी डिपार्टमेंटल कमिटीज हैं जिसमें कि 16 लोकसभा से और आठ राज्यसभा से
हैं। जिसमें 31 मेंबर्स होते हैं 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से। उसके बाद
वोटिंग होती है डिमांड फॉर ग्रांट्स पे। देन एप्रोप्रिएशन बिल पास होता है एंड देन
फाइनेंस बिल पास होता है। एप्रोप्रिएशन बिल अगर बात करें आर्टिकल नंबर 114 में है
और फाइनेंस बिल की बात करेंगे 117 में ये पास किए बिना एप्रोप्रिएशन बिल पास किए
बिना गवर्नमेंट यानी सरकार पैसा नहीं निकाल सकती है फ्रॉम व्हाट फ्रॉम
कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया व्हिच इज़ मेंशंड अंडर आर्टिकल नंबर 266 कंसोलिडेट
फंड ऑफ इंडिया में भारत सरकार का जितना भी टैक्स वगैरह का पैसा आता है वो सब यहीं पे
आता है और बिना इस बिल को पास किए सरकार पैसा नहीं निकाल सकती है। इसके अलावा भी
वह होते हैं। जैसे कि पब्लिक अकाउंट ऑफ़ इंडिया होता है और एक आपका कंटिंजेंसी फ़ंड
होता है। ठीक है? इससे पैसा निकाला जा सकता है बिना कोई बिल या फिर बिना हाउस
बिना पार्लियामेंट के परमिशन के लिए। बिकॉज़ ये इनकी जो एग्जीक्यूटिव होती है
अगर हम देखें यानी कि जो सरकार होती है उसी के डिस्पोजल में होता है। ये किसके
डिस्पोजल में होता है? कंसल्ट फंड ऑफ़ इंडिया। यह हम बोल सकते हैं पूरे
पार्लियामेंट के डिस्पोजल में है। यह सिर्फ सरकार यानी एग्जीक्यूटिव के
डिस्पोजल में है। दिस इज़ अंडर द डिस्पोजल ऑफ़ लेजिस्लेचर एंड दिस अंडर द
एग्जीक्यूटिव। इसका भी आर्टिकल 266 ही होता है। लेकिन क्लॉज़ टू है और इसका
आर्टिकल जो कंटिंजेंसी फंड है आकस्मिक जिसको फंड बोलते हैं। जहां पर इमरजेंसी से
पैसा निका इमरजेंसी के टाइम पे पैसा निकाला जा सकता है। दैट इज़ आर्टिकल नंबर
267। हैविंग रिवाइज़ दिस थिंग। ठीक है? और ये जो चीजें हैं आपको पता होनी चाहिए इस
बजट के बारे में। अब हम आते हैं यहां पे मेन जो चीजें हैं। ठीक है? तो सबसे पहली
बात तो ये है कि यहां पे मीठी-मीठी बातें लिखी हुई हैं। जिनसे हमारे एग्जाम
पर्सपेक्टिव से उतनी इंपॉर्टेंट नहीं है। चाहें तो एक बार देख सकते हैं कि जो हमारा
ग्रोथ रेट है उसका टारगेट कितना रखा गया है? 7% का एनर्जी सिक्योरिटी, डोमेस्टिक
मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी, सिटीज़न बेनिफिट फ्रॉम गवर्नमेंट जो एक्टेंस हैं, स्ट्रांग
थ्रस्ट ऑन पब्लिक इन्वेस्टमेंट, मॉनिटरी स्टेबिलिटी, फिसिकल प्रूडेंस, फार रीचिंग,
स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स, रिड्यूसिंग और रिड्यूस्ड क्रिटिकल इंपोर्ट डिपेंडेंस।
जैसे कि अभी हम देखेंगे क्रिटिकल इंपोर्ट डिपेंडेंस में एक रेयर अर्थ जो हमारे
मेटल्स होते हैं या फिर मिनरल्स जिनको कि हम इंपोर्ट करते हैं मेनली फ्रॉम चाइना
बिकॉज़ चाइना इज़ दी डोमिनेटिंग मार्केट व्हेन इट कम्स टू दी रेयर अर्थ मेटल्स। और
जो आजकल बहुत ज्यादा यूज़ में है। बिकॉज़ जो भी आप देखिए जितने भी इलेक्ट्रॉनिक
गैजेट्स हैं सब में यूज़ होता है वो रेयर अर्थ मेटल्स। क्या होते हैं अभी आगे
देखेंगे और एनर्जी सिक्योरिटी। तो ये सारी चीजें फोकस में रहेंगी गवर्नमेंट के और
टारगेट है 7% का। ऑलराइट? एम वगैरह यहां पे लिखा हुआ है जो आपसे एग्जाम में एस सच
नहीं पूछता है। ठीक है? ये भी आप एक बार चाहें तो देख सकते हैं। युवा शक्ति डिवन
जो बजट है। ठीक है? कि पहला कर्तव्य क्या है? तीन कर्तव्य यहां निर्धारित किए गए
हैं। पहला कर्तव्य टू एक्सलरेट एंड सस्टेन इकोनमिक ग्रोथ। दूसरा है फुलफिल
एस्पिरेशंस ऑफ आवर पीपल एंड तीसरा है विज़न ऑफ़ सबका साथ सबका विकास। अगेन ये सारी
चीजें एग्जाम में अगर मैं बात करूं तो इतना डायरेक्टली नहीं पूछता है। क्या
पूछेगा आपसे? जैसे फॉर एग्जांपल यहां पे आप देखिए तो गवर्नमेंट हैज़ अंडरटेकन
कॉम्प्रिहेंसिव इकोनमिक रिफॉर्म्स टुवर्ड ये भी इतना इंपॉर्टेंट नहीं है। ओवर 350
रिफॉर्म्स हैव बीन रोल्ड आउट इंक्लूडिंग जीएसटी सिंपलीफिकेशन। अगेन जीएसटी की जो
स्लैब्स हैं उसमें कोई चेंज नहीं आया। बिकॉज़ दिवाली से पहले सब कुछ हो चुका था।
तक खुद तो कोई एक्सपेक्ट कर भी नहीं रहा था कि जीएसटी में ऐसे कोई मेजर चेंजेस
होने वाले हैं। ऑलराइट आगे बढ़ते हैं यहां पे। ये भी आपको नहीं पढ़ना है। ऐसे सब
मीठी-मीठी बातें हैं। ये है मेन मुद्दा काम की बात। एंड दैट इज़ मैन्युफैक्चरिंग
स्ट्रेटेजिक एंड फ्रंटियर सेक्टर्स। सबसे पहले तो ये देखिए जो इंडिया सेमीकंडक्टर
मिशन है 2.0 1.0 कब ल्च हुआ था? 2021 में ल्च हुआ था। उसका ये 2.0 है। जैसे अपने
बैच आते हैं 1.0, 2.0 जैसे अभी 4.0 चल रहा था वैसे ही 2.0 है और इसके लिए 4000 करोड़
का आउटले ये नंबर याद रखना है आपको। ठीक है? एक तो पहली बात तो इंडिया का
सेमीकंडक्टर मिशन मतलब सेमीकंडक्टर को को प्रमोट करने के लिए। ऑलराइट। और पहला वाला
कब ल्च किया गया था? 2021 में। और यह 2.0 के लिए ₹400 करोड़ का बजट साइड किया गया
है। मीकंडक्टरेंट इसलिए बिकॉज़ इसका भी यूज़ जैसे एलईडीज वगैरह में बहुत किया
जाता है। इसमें क्या-क्या आते हैं? जैसे कि आपका सिलिकॉन आता है, जर्मेनियम आता
है, गैलियम आता है, आर्सेनिक आता है। ठीक है? कमेंट में आपको बताना है पीरियडिक
टेबल में ये कहां पे आपको देखने को मिलते हैं? किस ब्लॉक में देखने को मिलते हैं
सेमीकंडक्टर्स। ऑलराइट? देन आते हैं बायोफार्मा जो शक्ति है। अब ये क्या है?
तो नॉन कम्युनिकबल डिजीज जैसे कि अर्थराइटिस हो गया, डायबिटीज हो गया,
कार्डियोवस्कुलर डिजीज जैसे कि हार्ट डिजी हार्ट अटैक्स वगैरह हो गए। ये सब काफी बढ़
रहे हैं। तो उसको प्रिवेंट करने के लिए बायोफार्मा शक्ति इसके लिए ₹1,000 करोड़
गवर्नमेंट ने बोला है कि हम एलोकेट करेंगे। इसके तहत कब तक? अगले 5 सालों के
लिए। ठीक है? और तीन नए इंस्टीटशंस भी ओपन किए जाएंगे। वो कहां पे किए जाएंगे? उसका
यहां पे कोई जिक्र नहीं है। स्कीम फॉर रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट। और इसके लिए
भी स्कीम है। एक्चुअल में जो हमारे रेयर अर्थ मेटल्स हैं उसके लिए एक कॉरिडोर भी
बनाया जाएगा। आपको पता है रेयर अर्थ कॉरिडोर वो कहां-कहां पे बनेगा? तमिलनाडु
मतलब किसको कनेक्ट करेगा? तो सबसे पहले तमिल ये केरल तमिलनाडु को। ठीक है? देन
आपको पता है तमिलनाडु के ऊपर कौन सा स्टेट है? आंध्रा। आंध्रा के ऊपर कौन सा?
उड़ीसा। तो इस तरीके से याद रखना है एल। ठीक है? उड़ीसा, आंध्रा, तमिलनाडु और
केरल। इस तरीके से ध्यान रखना ये रेयर अर्थ जो हमारा कॉरिडोर है वो इन चार स्टेट
से पास होगा। ऑलराइट ये चीज ध्यान रखिएगा। टोटल कितने रेयर अर्थ मिनरल्स होते हैं
हमारे? 17 होते हैं। ध्यान रखना है। 17 जिसमें कि 15 जो हमारे लैंथेनाइड्स होते
हैं जो कि एफ ब्लॉक से बिलोंग करते हैं। आपको पता है लैंथेनाइड्स एंड एक्टिनाइड्स
दे आर फ्रॉम द एफ ब्लॉक। तो उसमें जो लैंथेन लैंथेन पूरे लैंथेनाइड्स हैं 15।
एक्टिनाइड्स भी होते हैं 15। तो 15 लैंथेनाइट्स और दो ये आपके एक तो
ये टेररियम है। ठीक है? ये टेररियम और एक स्केंडियम। ये टोटल मिला के 17 रेयर अर्थ
मिनरल्स होते हैं। जिसमें कि चाइना इज़ द डोमिनेटिंग कंट्री इन द एंटायर वर्ल्ड।
ठीक है? तो उस पे डिपेंडेंसी कम करने के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर वगैरह ये सब किया
जाएगा। ओके? तीन डेडिकेटेड केमिकल पार्कक्स एनहांसिंग डोमेस्टिक प्रोडक्शन।
केमिकल पार्कक्स ओपन किए जाएंगे। डोमेस्टिक प्रोडक्शन एंड इंडीजीनस
प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए। ठीक है? बाकी एक स्कीम है टू रिवाइव 200 लेगेसी जो
हमारी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स हैं उनके उसके लिए स्कीम लांच करी गई है एंड
इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर टेक्सटाइल्स ठीक है ज्यादा इंपॉर्टेंट नहीं है ओके तो
ये इंपॉर्टेंट था ये इंपॉर्टेंट था और रेयर अर्थ वाला जो आपका है ये इंपॉर्टेंट
था ये तीन चीजें अच्छे से ध्यान रखिएगा यहां से क्वेश्चन आपका बन सकता है ठीक है
देन यहां पे टैक्स रिफॉर्म दिए गए हैं कुछ बूस्ट करने के लिए क्या मैन्युफैक्चरिंग
सेक्टर को बूस्ट करने के लिए ठीक है और वैसे तो ध्यान रखिएगा तो जो भी हमारे यहां
पे आई थिंक लिखा होगा चलो मैं पहले बता ही देता हूं आपको यहां पे एंड दैट इज़ कि जो
हमारे 17 क्रिटिकल ड्रग्स रहने वाले हैं। ठीक है? उनसे जो इंपोर्ट ड्यूटी है उसको
खत्म कर दिया गया पूरी तरीके से। ये इंपॉर्टेंट है। पूरी तरीके से खत्म कर
दिया गया है। ठीक है? और जो टीसीएस है टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स। ठीक है? टैक्स
कलेक्टेड एट सोर्स फॉर दी मेडिकल रेमिटेंस रेमिटेंस जो बाहर से पैसा आ रहा है भारत
में। ठीक है? उसमें टैक्स जो है वो 5% से 2% कम कर दिया गया। ध्यान रखना टीसीएस।
टीसीएस क्या होता टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स। बाकी तो यहां पे देख लेते हैं
कि गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया अर्न्स ₹100। ऑलराइट? ₹100 अर्न करती है तो उसमें से
गवर्नमेंट को ₹24 सबसे ज्यादा बोरोइंग्स एंड लायबिलिटी से आता है। यानी कि
गवर्नमेंट की जो सबसे बड़ा इनकम का सोर्स है वो उधार है। ठीक है? जैसे आपका है। ठीक
है? फिर सेकंड है आपका इनकम टैक्स जो कि डायरेक्ट टैक्स होता है। अगेन टैक्स वैक्स
उसी लेक्चर में हम लोग पढ़ेंगे। आई थिंक जब मनी एंड बैंकिंग खत्म हो जाएगा उसके बाद
हम लोग करेंगे। ठीक है? देन कॉरपोरेशन टैक्स जो बिज़नेसेस को भरना होता है 18%।
देन जीएसटी एंड अदर टैक्सेस 15% नॉन रेवेन्यू नॉन टैक्स रेवेन्यूस जो है जो
टैक्स के अलावा जो रेवेन्यू आता है टैक्स के अलावा रेवेन्यू क्या होता है गवर्नमेंट
ने लोन दिया तो उसका ब्याज वगैरह ठीक है एक सेकंड
ऑलराइट तो गवर्नमेंट ने जो लोन वगैरह दिया तो उसका
जो इंटरेस्ट वगैरह जो ब्याज वगैरह है वो सब नॉन टैक्स रेवेन्यू में आता है। ऑलाइट
ये चीज ध्यान रखना है या फिर गवर्नमेंट कहीं पर डिविडेंड कमा रही है यानी सैलरी
काइंड ऑफ सैलरी होती है ना वो गवर्नमेंट की गवर्नमेंट का मान लो कि कोई पीएसयू है
पब्लिक उसमें जो काइंड ऑफ़ प्रॉफिट हो रहा है वो उसी में आता है आपका रेवेन्यू वाले
कॉम्पोनेंट में रेवेन्यू रिसीट का पार्ट होता है नॉन टैक्स रेवेन्यू में नॉन डे
कैपिटल रिसीप्ट 2% मैंने अभी आपको बता दिया क्या होता है नॉन डे कैपिटल रिसीप्ट
4% कस्टम्स और 6% एक्साइज ड्यूटी सबसे बड़ा सोर्स बोरोइंग है उसके बाद उसके बाद इनकम
टैक्स और देन कॉर्पोरेशन टैक्स दोनों ही डायरेक्ट टैक्स के प्रकार होते हैं ये
बिज़नेसेस को भरना होता है इंडिविजुअल को भरना होता है। ठीक है? और प्रोग्रेसिव
नेचर के होते हैं। ये डायरेक्ट टैक्सेस जीएसटी यू नो इनडायरेक्ट टैक्स होता है।
अगेन इकोनॉमिक्स अभी हम लोग कर रहे हैं। तो उसमें डिटेल में देखेंगे। रुपी गोज़ टू
अगर मान लो कि ₹100 गवर्नमेंट खर्चा कर रही है तो उसमें सबसे ज्यादा ₹22 कहां पे
दे रही है? राज्यों को दे रही है। उसका जो हक है वह दे रही है। उसके बाद उसके बाद जो
सेंट्रल सेक्टर स्कीम्स हैं वह स्कीम जहां पे 100% फंडिंग सेंट्रल गवर्नमेंट की तरफ
से ही होती है। उसमें ₹17 जा रहे हैं। उससे ज्यादा यानी इससे भी ज्यादा यहां पे
जा रहा है ब्याज भरने में। क्योंकि बोरोइंग अगर इतनी ज्यादा है तो
ब्याज भी तो ज्यादा होगा। तो सबसे बड़ा शेयर तो स्टेट का चला जाता है। उसके बाद
ब्याज में चला जाता है। उसके बाद सेंट्रल सेक्टर स्कीम है। उसके बाद अगर आप देखोगे
तो सेंट्रली स्पों्सर्ड स्कीम में यानी वो स्कीम जहां पे सेंटर तो देती है फंडिंग
लेकिन स्टेट की तरफ से भी फंडिंग रहती है। देन उसके बाद अगर बात करेंगे डिफेंस में
11% है। फाइनेंस कमीशन एंड अदर ट्रांसफरर्स में 7% अदर एक्सपेंडिचर 7%
ठीक है? एंड मेजर सब्सिडीज 6% और सिविल पेंशन आपकी 2% में जाता है। ओके? यहां पे
ये एस्टीिमेशन लिखे हुए हैं लाख करोड़ में कि भाई कैपिटल रिसीप्ट 18.1 लाख करोड़।
कैपिटल रिसीप्ट में क्या आता है? अगेन दो तरीके की होती हैं। डेप्ट क्रिएटिंग नॉन
डे क्रिएटिंग। लोन आ गया आपका। डिसइन्वेस्टमेंट आ गया आपका। ठीक है?
डिसइन्वेस्टमेंट या फिर हम बोल सकते हैं कि कैपिटल रिसीप्ट
बात करें ना। ठीक है? तो लोन हो गया, डिसइन्वेस्टमेंट या फिर लोन की रिकवरी हो
गई। लोन की रिकवरी कर ली है। तो ये सब कैपिटल रिसीप्ट में आते हैं। रेवेन्यू
रिसीप्ट में क्या आता है? तो दो तरीके का होता है। टैक्स और नॉन टैक्स। टैक्स में
डायरेक्ट टैक्स इनडायरेक्ट टैक्स नॉन और ये क्या है नॉन टैक्स में तो नॉन टैक्स
में आता है आपका जैसे मैंने आपको बताया जैसे इंटरेस्ट ब्याज कहीं से आ रहा है
डिविडेंड हो गए गवर्नमेंट के वो सारा पैसा रेवेन्यू रिसीप्ट में आता है जो 35.3 लाख
करोड़ गवर्नमेंट का है रहने वाला है इस पर मतलब ये रहने वाला है एस्टीमेट रहेगा नहीं
रहेगा वो नहीं पता है इतना रहेगा एस्टीिमेशन है यानी गवर्नमेंट के रेवेन्यू
रिसीप्ट ज्यादा रहने वाले हैं एक्सपेंडिचर की बात करेंगे तो इफेक्टिव कैपिटल
एक्सपेंडिचर तो इफेक्टिव कैपिटल एक्सपेंडिचर में 17.1
यह रहेगा 17.1 लाख करोड़ 2026 में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर 41.3 लाख करोड़।
अच्छा जो कैपिटल एक्सपेंडिचर होता है वो क्या होता है? वो डेवलपमेंटल नेचर का होता
है। तो जो गवर्नमेंट डेवलपमेंट करती है। इससे क्या होता है? एसेट क्रिएशन होता है
या लायबिलिटी गवर्नमेंट की कम होती है। एसेट क्रिएशन जैसे कि मान लो कोई रोड,
स्कूल, कॉलेजेस, बिल्डिंग, पीएसयू ये सब बिल्ड कर रही है। एसेट क्रिएशन हो रहा है।
ठीक है? लायबिलिटी कैसे कम हो रही है? लोन का रीपेमेंट हो रहा है। लोन कभी लिया था
उसको [ __ ] कर दिया। या फिर या फिर लोन किसी को दिया है। किसी को दिया है वह लोन
इससे एसेट क्रिएशन हो रहा है। इससे लायबिलिटी कम हो रही है। इससे एसेट
क्रिएशन हो रहा है। जो हम रोड और ये सब बिल्ड करने की बात कर रहे हैं। तो इसमें
एसेट क्रिएशन होता है। लायबिलिटी कम होती है। और इसमें क्या होता है रेट में? इसमें
या तो हमारी एसेट जाती है। डिसन्वेस्टमेंट कर दिया या लायबिलिटी बनती है। लोन ले
लिया। रेवेन्यू वाले कॉमोनेंट में ना तो एसेट क्रिएशन होता है ना लायबिलिटी का कुछ
होता है। ठीक है? तो 41.3 ये दिखा रहा है कि हमारे रेवेन्यू एक्सपेंडिचर ज्यादा
हैं। इनफैक्ट हमारे ये ज्यादा होने चाहिए। क्यों? क्योंकि ये लॉन्ग टर्म होते हैं।
लॉन्ग टर्म कैसे? रोड, स्कूल। लेकिन इस पे तो वोट पड़ता ही नहीं है। वोट तो पड़ता है
जो ऐसे में रेवड़ियां बांटी जाती हैं। है ना? ये बहना योजना, वो बहना योजना सब पैसा
यहीं से यहीं से निकलता है वो रेवेन्यू एक्सपेंडिचर से। जैसे-जैसे गवर्नमेंट ये
ज्यादा फोकस करती। इसमें तो वही है ना कि आपको चीजें डेवलपमेंटल चीजें बिल्ड करने
पड़ेगी। अब मान लो स्कूल बिल्ड कर रहे हो। कौन देता है स्कूल के नाम पे वुड की स्कूल
बिल्ड कर दिए उन्होंने कॉलेज भाई। ठीक है? सिंपल सा आपको पता है। तो इसीलिए इंडिया
में कैपिटल एक्सपेंडिचर काफी कम होता है एज़ कंपेयर टू रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। ओके?
ठीक है? एक्सपेंडिचर ऑफ मेजर आइटम्स आप देखेंगे तो यहां पे आप देखिए मेजर आइटम
सबसे ज्यादा ट्रांसपोर्ट में होता है। 598000
करोड़। देन डिफेंस में देन रूरल डेवलपमेंट होम अफेयर्स।
टॉप फोर याद रखिएगा। ठीक है? ये ज्यादा इंपॉर्टेंट है। ओके? एंड वी आर डन विद
टुडेज़ लेक्चर। ठीक है? ठीक है? तो जो इंपॉर्टेंट चीजें थी बजट में आज के या फिर
इस साल के ठीक है वो हमने कर लिए हैं। एंड थैंक यू। इसका पीडीएफ आपको मिल जाएगा
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डिस्क्रिप्शन। कुछ आपके सुझाव हैं, कुछ कमेंट करना है आपको मतलब कुछ डाउट है तो
आप कमेंट्स में बता सकते हैं, पूछ सकते हैं। ऑलराइट थैंक यू। धन्यवाद।
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