This content describes the Sri Lalita Tripurasundari Kavach, a powerful mantra-based protective chant believed to grant all desires and siddhis (spiritual powers) to those who recite it with devotion.
Mind Map
Нажмите, чтобы развернуть
Нажмите, чтобы открыть полную интерактивную карту
श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी को नमस्कार। त्रिपुरणव के अनुसार त्रि का अर्थ है
सुषुमना, पिंगला और इड़ा नाड़ियां और पुर का अर्थ है मन, बुद्धि और चित्त। अतः
इनमें निवास करने के कारण ही मां को त्रिपुरा कहते हैं। समस्त मनोवांछित फल को
प्रदान करने वाले इस श्री कवच को जो व्यक्ति तीनों संध्याओं में पढ़ता है, वह
सारी सिद्धियों को प्राप्त करता है। श्री पार्वती ने कहा, हे भगवन आप सब लोकों के
ईश्वर हैं। सब लोकों द्वारा वंदित हैं। मैं तत्व ज्ञान देने वाले गुप्त से गुप्त
ज्ञान को सुनना चाहती हूं। श्री ईश्वर ने कहा हे देवी भगवती त्रिपुर सुंदरी को
प्रसन्न करने वाला कवच बताऊंगा जो मंत्र रूप है और रहस्यों का भी रहस्य है। ध्यान
पूर्वक श्रवण करो। विनियोग इस श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी के कवच स्तोत्र रूपी मंत्र
के ऋषि श्री दक्षिण मूर्ति अनुष्टुप छंद है। श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी देवता हैं।
एम क ए ई ल हरीम बीज है। सः स क ल हरीम शक्ति है। क्लीम ह स क ह ल हरीम कीलक है।
और इसका विनियोग सर्वाभीष्ट सिद्धि के लिए किया जाता है। जप करते समय केसर युक्त
उबटन वाली जिनके मस्तक पर कस्तूरी लगी हुई है। मंद हास युक्त नेत्रों वाली धनुष बाण
पाश और अंकुश से युक्त संपूर्ण जनों को मोहित करने वाली लाल रंग की पुष्प माला
एवं रक्त वस्त्र धारण करने वाली जपा पुष्प के समान आभा वाली माता का स्मरण करना
चाहिए। हे चतुर्भुजे हे चंद्रकला रूपी करणा भूषण वाली उठे हुए स्तनों वाली केसर
के रंग के समान लाल रंग वाली इक्षु धनुष पाश अंकुश और पुष्प बाणों को हाथ में रखने
वाली संसार का एकमात्र पालन करने वाली आपको नमस्कार है ओम कवच पाठ क कार मेरे
सिर की रक्षा करें एकार सीमांत भाग की रक्षा करें इकार मेरे मुख की रक्षा रक्षा
करें और लकार दोनों भों की रक्षा करें। हकार हृदय की रक्षा करें और वागभव सदा
रक्षा करें। हकार उदर की और सकार नाभि की रक्षा करें। ककार पार्श्व भाग की तथा हकार
पृष्ठ भाग की रक्षा करें। लकार मेरे नितंब की तथा हरीमकार मूल स्थान की रक्षा करें।
कामराज सदा उदराद स्थानों की रक्षा करें। सकार मेरे कट स्थान की रक्षा करें और ककार
लिंग स्थान की रक्षा करें। लकार दोनों घुटनों की रक्षा करें। और हकार जंघाओं की
रक्षा करें। शक्ति बीज सदा रक्षा करें। मूल विद्या सदा रक्षा करें। त्रिपुरा और
त्रिपुरेशी मेरी रक्षा करें। अष्टदल की देवता त्रिपुर सुंदरी रक्षा करें।
त्रिपुरा वासनी सदा रक्षा करें। त्रिपुरा श्री सदा रक्षा करें। त्रिपुरा मालिनी
रक्षा करें। त्रिपुरा सिद्धिदा रक्षा करें। त्रिपुरांबा रक्षा करें और त्रिपुर
भैरवी रक्षा करें। अणिमा आदि रक्षा करें और ब्राह्मी आदि मेरी सदा रक्षा करें। उसी
प्रकार कामकर्षणी आदि नव मुद्राएं रक्षा करें। अनंग कुसुमा आदि शोडाक्षर में मेरी
रक्षा करें। सर्व संशोभन आदि अष्टदलों में मेरी रक्षा करें। सर्व सिद्धि प्रदायिका
चक्र कोणों में मेरी रक्षा करें। संपूर्ण मनोरथों को परिपूर्ण करने वाली सर्वज्ञा
आदि बाह्य कोणों में तथा मध्यादि कोणों में मेरी रक्षा करें। इस प्रकार अष्टदल की
देवता वशिनी आदि रक्षा करें और सभी आयुध त्रिकोण के अंतरालों में मेरी रक्षा करें।
कोणों में विराजमान कामेश्वरी आदि त्रिकोण में रक्षा करें और इस प्रकार श्रीमद
त्रिपुर सुंदरी बिंदु चक्र में रक्षा करें। इस प्रकार भगवान शंकर द्वारा कहा
गया यह सर्व सिद्धिदायक श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी का कवच संपूर्ण हुआ। इसे
पढ़ने वाला साधक तीनों लोकों को अपने वश में कर लेता है। प्रेम से बोलिए मां देवी
की जय। प्रिय श्रोताओं, यदि आपको यह कवच अच्छा लगा हो तो इसे लाइक करना ना भूलें।
इसे अन्य देवी भक्तों में अवश्य शेयर करें तथा इसी प्रकार अन्य कवच हिंदी में सुनने
के लिए मंत्र सरोवर चैनल को सब्सक्राइब
Нажмите на любой текст или временную метку, чтобы перейти к этому моменту видео
Поделиться:
Большинство транскрипций готово менее чем за 5 секунд
Копировать одним кликом125+ языковПоиск по текстуПерейти к временным меткам
Вставьте ссылку на YouTube
Введите ссылку на любое YouTube-видео, чтобы получить полную транскрипцию
Форма извлечения транскрипции
Большинство транскрипций готово менее чем за 5 секунд
Установите расширение для Chrome
Получайте транскрипции прямо на YouTube, не переходя на другие сайты. Установите наше расширение и открывайте текст любого видео в один клик — прямо на странице просмотра.